सुरक्षित शनिवार में आज बाल श्रम और बाल विवाह निषेध पर जानकारी
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| PS / MS छतौद |
आज दिनांक 9 सितंबर 2023 को छतौद स्कूल में मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा कार्यक्रम के तहत बाल श्रम और बाल विवाह पर चर्चा कर जानकारी गतिविधि के माध्यम से बच्चों को दी गई जिसमें शुरुआत में शिक्षक श्री विजय वर्मा द्वारा महाभारत के अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए बच्चों को लगातार पढाई जुड़े रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जैसे अभिमन्यु को चक्रव्यूह को तोड़कर अंदर जाने का ज्ञान तो था लेकिन बाहर आने का ज्ञान नहीं था अर्थात उन्हें अधूरा ज्ञान था उसी प्रकार अगर आप (विद्यार्थी) भी लगातार शाला नहीं आएंगे, पढाई में निरंतरता नहीं रहेगी तो आपका भी ज्ञान अधूरा रह जायेगा।
बाल विवाह एक अपराध
अब समय था आज के विषय पर आने का। सर ने कोशा (रेशम का कीड़ा वाला) का उदाहरण बाल विवाह के विषय के ऊपर दिया। जिसमें उन्होंने बताया की एक बार ऐसा होता है कि एक बालक के हाथ में कोशा लगता है जब वह उसको हिला कर देखता है तो उसके अंदर से खड़-खड़ की आवाज आती है तो उसे लगता है की अंदर जो कीड़ा है उसे बाहर आने में समस्या होगी तो मैं अगर बाहर निकाल दूं तो अच्छा रहेगा ऐसा सोचकर वह उस बंद कोशे से उस कीड़े को बाहर निकाल देता है लेकिन वह कीड़ा अर्थात रेशम का कीड़ा बाहर के वातावरण को झेल नहीं पाता इस वजह से वह मर जाता है। इस उदाहरण से उन्होंने बच्चों को यह समझाने की कोशिश की कि जब तक किसी की परिपक्वता या सामर्थ्य ना आ जाए उसे किसी चीज के लिए जबरदस्ती नहीं धकेलना चाहिए अर्थात जो एक शादी की उम्र होती है उस उम्र के पहले अगर हम बच्चों की शादी कर देते हैं तो उन्हें भी बहुत सारी तकलीफों को झेलना पड़ता है और बहुत सारी शारीरिक चुनौतियां भी आती हैं। इस वजह से कम उम्र में अर्थात बाल विवाह नहीं करना चाहिए।
सरकार की ओर से लड़कों की शादी के लिए 21 वर्ष और लड़कियों की शादी के लिए 18 वर्ष की समय सीमा को निर्धारित किया गया है इससे पहले शादी करना गैरकानूनी और अपराध होता है यह सब बातें बच्चों को समझाई गई।
बाल श्रम अपराध
अब आज का हमारा जो दूसरा विषय था वह था बाल श्रम के ऊपर जिस पर सर ने एक और उदाहरण दिया बाज और उसके बच्चे का। उन्होंने बताया कि एक बाज को पता होता है कि उसका बच्चा कितने दिन बाद में उड़ान भरने के लायक हो सकता है जब बाज उसे मतलब अपने बच्चे को खुले आसमान में उड़ान भरना सिखाता है तो बहुत ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ देता है जब वह नीचे जमीन की ओर गिरते रहता है तब वह बाज का बच्चा पंख खोल कर उड़ना सीख जाता है। ठीक उसी प्रकार एक बच्चा होता है जिसे जब तक उसके काम करने के लिए शरीर तैयार न हो उसे काम में नहीं धकेलना चाहिए क्यूंकि यह उम्र उसके पढाई लिखाई का होता है। सरकार ने भी एक कानून बनाया है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाई से वंचित कर किसी शारीरिक श्रम के कार्य में लगाना एक कानून अपराध है।
इस विषय पर पूर्व माध्यमिक शाला के छात्राओं ने एक ने एक गतिविधि मंच पर प्रस्तुत किए जिसमें एक परिवार अपने बच्चों को अपने साथ काम पर ले जाता है और उसे स्कूल जाने नहीं देते तो कुछ जागरूक पालक आकर उन्हें बाल श्रम कानून और बच्चों की शिक्षा से संबंधित कानून को बताते हैं और समझाते हैं जिससे वो पालक समझ जाते हैं और अपने बच्चों को शाला भेजने हेतु तैयार हो जाते हैं।
नवीन प्राथमिक शाला की गतिविधियां
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| NPS छतौद |
तो इस तरह से मुख्यमंत्री साला सुरक्षा योजना के तहत आज के सुरक्षित शनिवार के विषय है बाल विवाह और बाल श्रम को बच्चों को समझाया गया।

