नाग-पंचमी उत्सव प्राथमिक, नवीन प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला- छतौद
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| नाग पंचमी PS, MS छतौद |
आज दिनांक 21/08/2023 को नाग पंचमी की तिथि है। नाग पंचमी हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि को मनाया जाता है। हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी हमारे शाला में भी नाग पंचमी मनाया गया जिसमे ग्रीन बोर्ड में नाग देवता का चित्र बनाया गया था और उनकी पूजा अर्चना शिक्षकों और विद्यार्थियों के द्वारा की गई।
पूजा अर्चना के पश्चात् हमारे शाला के वरिष्ठ शिक्षक श्री आर. डी. वर्मा सर द्वारा भगवान शंकर जी का "मेरा भोला मगन है" भजन सुनाया गया जिस पर शाला के पूरे विद्यार्थियों ने जोर शोर से साथ दिया फिर पूर्व माध्यमिक के छात्राओं द्वारा भी अन्य भजन सुनाया गया। अंत में शाला में प्रसाद वितरण करके कार्यक्रम समाप्त किया गया।
नवीन प्राथमिक शाला की नाग पंचमी
नवीन प्राथमिक शाला में भी शिक्षकों, विद्यार्थियों और मध्यान भोजन रसोइयों के द्वारा ब्लैकबोर्ड में नाग देवता के चित्र की पूजा अर्चना की गई एवम प्रसाद वितरण किया गया।
शालाओं में नाग पंचमी मनाने की परंपरा बहुत वर्षों से चली आ रही है। याद कीजिये अपने समय को जब आप भी छोटे थे स्कूल जाया करते थे और नाग पंचमी के दिन मिट्टी के स्लेट(पट्टी) में नाग सांप का फोटो बनाकर स्कूल ले जाते थे साथ में थोड़ा सा दूध, गुलाल, अगरबती लेकर हम अपने शाला जाया करते थे। बड़े ही उत्साह और भाव से ब्लैक बोर्ड और अपने स्लेट(पट्टी) में बने नाग सांप की पूजा किया करते थे। कुछ बहादुर लोग तो बड़े बड़े बिल और टीलों (जहां सांप पाए की सम्भावना होती थी वहाँ भी पूजा कर लिया करते थे)।
नाग पंचमी क्यों मनाते हैं?
महाभारत में युधिष्ठिर के बाद अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को राजा बनाया। एक शाप की वजह से परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हो गई थी। परीक्षित के बाद उसका पुत्र जनमेजय राजा बना। जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला नागों से लेना चाहता था। उसने पृथ्वी के सभी नागों को एक साथ मारने के लिए नाग दाह यज्ञ करवाया। इस यज्ञ की वजह से नाग खत्म होने लगे। जब ये बात आस्तिक मुनि को मालूम हुई तो वे तुरंत राजा जनमेजय के पास पहुंचे।
आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय को समाझाया और ये यज्ञ रुकवाया। जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी थी। उस दिन आस्तिक मुनि के कारण नागों की रक्षा हो गई। इसके बाद से नाग पंचमी पर्व मनाने की शुरूआत हुई। (स्त्रोत - इंटरनेट)
बच्चों के ज्ञान और समझ में बढ़ोत्तरी हो इसलिए कुछ सामाजिक परम्पराओं से बच्चों को जोड़े रखना जरुरी है, जिससे कि बौद्धिक ज्ञान और शारीरिक विकास के साथ साथ उनका सर्वागीण विकास हो।